शनिवार, जून 21, 2014

दिवा स्वप्न बनी अटल ज्योति, बदलेगें कांग्रेस अध्यक्ष , घर घर फुंक गये मोदी , केजरीवाल से ज्यादा बुरा अंजाम मोदी का

दिवा स्वप्न बनी अटल ज्योति, बदलेगें कांग्रेस अध्यक्ष , घर घर फुंक गये मोदी , केजरीवाल से ज्यादा बुरा अंजाम मोदी का
मुरैना - डायरी
कुंवर उजागर सिंह चौहान
म.प्र. से काफूर हुई आखि‍रकार चुनावी अटल ज्योति
बड़े जोर शोर से गाजे बाजे के साथ करीब सात आठ करोड़ रूपये के विज्ञापनों पर पैसा फूंक कर जनरेटरों के सहारे म.प्र. विधानसभा चुनावों के वक्त शुरू की गई चुनावी अटल ज्योति‍ हालांकि 25 नवंबर 2013 को ही म.प्र. विधानसभा चुनाव का मतदान समाप्त होते ही लपझप लपझप करने लगी थी , लेकिन मजबूरी थी कि कैसे भी करके इसे लोकसभा चुनावों तक तो कम से कम चलाया ही जाये , लिहाजा जैसे तैसे मार्च महीने में इसकी मरम्मत कर करा के डीजल पानी डाल के मार्च  से मई तक फिर इस खटारा को शि‍वराज सरकार ने घसीटा , 16 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम घोषि‍त होते ही फिर खटारा फेल हो गया और म.प्र. में तकरीबन हर इलाके में भरी भीषण गर्मी में बिना घोषणा अघोषि‍त बिजली कटौती पुन: न्यूनतम 8 घंटे से लेकर 16 – 17 घंटे तक की शुरू कर दी गई , अनेक बहानों के पुराने चीथड़े शि‍वराज सरकार म.प्र. की जनता को नन्हा मुन्ना बच्चा समझकर लगाती बहलाती रही , म.प्र. ही केवल भारत में ही नहीं अपितु समूचे विश्व में  एक ऐसा राज्य है , जहॉं साल के पूरे 365 दिन मेंटीनेन्स के नाम पर बिजली कटौती पिछले दस साल से लगातार की जा रही है , उल्लेखनीय है कि सन 2003 में म.प्र. में भाजपा केवल एक माह के भीतर 24 घंटे बिजली देने का वायदा करके सरकार में आई थी , उसके बाद सन 2008 में भी यही वायदा शि‍वराज ने हर जगह जाकर किया , और सन 2013 के चुनावों में भी इसी वायदे को लेकर और अरबों रूपये जनता के खून पसीने की कमाई के फोकट उड़ा कर अटल ज्योति‍ के नकली फिल्मी ड्रामे के साथ  शि‍वराज ने चुनाव लड़ा ।
यह उल्लेख प्रासंगिक व समीचीन होगा कि सन 2008 के विधानसभा चुनावों में म.प्र. में कांग्रेस के गलत टिकिट वितरण और टिकिट बेचे जाने , गलत प्रत्याशीयों के मैदान में उतारे जाने का भरपूर लाभ उठा कर शि‍वराज ने सत्ता में वापसी की तो वहीं सन 2013 के विधानसभा चुनावों में खुलकर कांग्रेस के टिकिट बेचे गये, गलत प्रत्याशी उतारे गये , आरोप यह है कि कांग्रेस के सारे टिकिट भाजपा ने और शि‍वराज ने अरबों खरबों रूपये देकर खरीद लिये , और सन 2013 में अपनी कहानी दोहराते हुये कांग्रेस ने म.प्र. की सत्ता पुन: शि‍वराज सिंह को बेच दी ।
म.प्र. कांग्रेस में भारी फेरबदल , बदलेंगें अनेक जिलाध्यक्ष
म.प्र. कांग्रेस में बहुत बड़ा परिवर्तन दस्तक दे रहा है , कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी निर्देशों में म.प्र. कांग्रेस में आमूलचूल बदलाव करने को कहा गया है , पूर्व पदाधि‍कारीयों या वर्तमान चालू सीरीज के पदाधि‍कारीयों को को संगठन में पुन: पद न देकर नये लोगों को व जमीनी लोगों को ही कांग्रेस संगठन में पद दिये जायें, इस के तहत मुरैना व दतिया के नये कांग्रेस  जिलाध्यक्षों के नाम लगभग तय हो चुके हैं , ऊपर से सूत्रों से मिल रही विश्वस्त खबरों के अनुसार मुरैना के लिये नरेन्द्र सिंह तोमर और दतिया के लिये प्रदीप गुर्जर का नाम कांग्रेस के नये जिलाध्यक्ष के रूप में तय कर दिया गया है , अब केवल घोषणा होनी बाकी है , शेष जगह के लिये कई जगह के नये कांग्रेस जिलाध्यक्ष तय किये जा चुके हैं तो कई जगह के लिये नये कांग्रेस जिलाध्यक्षों के नामों पर विचार मंथन जारी है , कांग्रेस में गुटबाजी समाप्त करने और निर्गट या गुटबाजी से दूर रहने वाले कांग्रेसियों को ही संगठन के पुनर्गठन में तवज्जुह दी जा रही है
जिस कारण सत्ता में आये, उसी कारण घर घर फुंक गये मोदी
मंहगाई खत्म करने और हर चीज सस्ती कर देने , अच्छे दिन आयेंगें या अच्छे दिन आने वाले हैं का सब्जबाग दिखाकर , जनता को लालच का लॉलीपॉप देकर सत्ता में आये नरेन्द्र मोदी की सरकार की बोहनी ही खराब हुई है , नरेन्द्र मोदी के सरकार में आते ही जहॉं एकदम से सभी चीजों के दाम उछल गये और मंहगाई सिर उठाकर आसमान चूमने लगी वहीं रेल बजट से पहले ही रेल किराये और माल भाड़े में वृद्ध‍ि , डीजल दामों में समानांतर श्रेणी में वृद्ध‍ि को लेकर  जनता भी कई फीट ऊँची उछल गई और देश भर में घर घर , हर घर में मोदी के पुतले पहले ही महीने में  फुंक गये , शपथ लिये अभी मोदी को महीना भी पूरा नहीं हुआ और उससे पहले ही घर घर पुतला दहन मोदी के लिये अपशकुन ही माना जायेगा और न देश के लिये , न मोदी और भाजपा के लिये इसे अच्छे आसार कहा जा सकता है
केजरीवाल से भी अधि‍क बुरा हश्र हो सकता है नरेन्द्र मोदी का
नई केन्द्र सरकार के आसार कुछ अच्छे नजर नहीं आ रहे , जख्म खाई दिल्ली की  जनता के साथ जो दोगला व्यवहार व भद्दा मजाक केजरीवाल ने किया , उसका तुरत फुरत फल केजरीवाल चख चुके हैं , केजरीवाल के ही कदमच्हि‍नों पर चल रही नरेन्द्र मोदी सरकार बिल्कुल उसी स्टाइल में केन्द्र में सरकार में आई है , जिस स्टाइल में केजरीवाल सरकार दिल्ली में आई थी , बस फर्क केवल इतना है कि केजरीवाल के पास खुद का बहुमत नहीं था और नरेन्द्र मोदी के पास खुद का बहुमत है , केजरीवाल की तुलना में नरेन्द्र मोदी का हश्र अधि‍क बुरा इसलिये होगा कि केजरीवाल के पास बहुमत न होने का एक आसान बहाना था , लेकिन नरेन्द्र मोदी के पास तो कोई बहाना ही शेष नहीं बचा है , नरेन्द्र मोदी के पास केवल एक चारा शेष बचा है , या तो करके दिखाओ , या फिर अब सदा के लिये वापस जाओ , नरेन्द्र मोदी के भयावह अंजाम से सीध सीधा भाजपा व आर.एस.एस. का भी अभि‍न्न रूप से   भयावह हश्र जुड़ा हुआ है, यह भी तय है कि नरेन्द्र मोदी उतना भी नहीं कर पायेंगें जितना दिखावटी व नकली ही सही, केजरीवाल ने कर दिया था , राजनीति में बातें करना आसान है , काम करना नामुमकिन , नरेन्द्र मोदी नामुमकिन को कर दिखाने के वायदे करके सत्ता में आये हैं , भारत की जनता की आदत है कि दवा वो चाहिये जिससे बुखार बस केवल तुरत फुरत दो मिनिट में छू मंतर हो जाये, नरेन्द्र मोदी इसी बुखार को केवल एक मिनिअ में छू मंतर कर देने की दवा देने वाले डॉक्टर का रूप धर कर आये हैं , एक कल्पनालोक व मायावी स्वप्न जनता को परोस कर सत्ता में आये हैं, इसलिये नरेन्द्र मोदी के सामने केवल करो या मरो के सिवा कोई चारा शेष नहीं है  
यह उल्लेखनीय है कि केवल बहुमत के सहारे सत्ता में अधि‍क दिन टिके रहना मोदी के लिये संभव नहीं है , एक सन्न‍िकट ही भारी जन विद्रोह या गृहयुद्ध की आशंकित संभावनाओं से कतई इंकार नहीं किया जा सकता , इसलिये बहुमत के बावजूद या तो नरेन्द्र मोदी को अपने चुनावी वायदों के मुताबिक तुरंत ही कुछ कर दिखाना होगा वरना देश में जन विद्रोह या गृहयुद्ध की सूरतों का सामना करना होगा , इसलिये यह स्पष्टत: लगभग कहा जा सकता है कि जो कह कर आये वह करना संभव नहीं , अगर किया नहीं तो सत्ता में रहना संभव नहीं , इसलिये अब या तो करो, करके दिखाओ या केजरीवाल सरकार से अधि‍क बुरा हश्र भुगतने को तैयार रहो  

मंगलवार, जून 10, 2014

NARENDRA SINGH TOMAR ट्विटर पे जुड़ने के लिए अभी भी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं.

 
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गुरुवार, जून 05, 2014

NARENDRA SINGH TOMAR ने आपको एक निमंत्रण भेजा

 
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शुक्रवार, दिसंबर 06, 2013

चुनावी सर्वे के खतरे - राकेश अचल

चुनावी सर्वे के खतरे
राकेश अचल
लेखक ग्वालियर के वरिष्ठतम पत्रकार एवं समाजसेवी हैं
देश में कोई भी चुनाव हो "एक्जिट"पोल और सर्वे दिखने की होड़ शुरू हो जाती है .इस बार भी यही हो रहा है .पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के लिए मतदान के फ़ौरन बाद अखबारोब और न्यूज चैनलों में "पोस्ट पोल"दिखाने की होड़ लगी है .पहले ये काम नामचीन्ह ज्योतिषियों के हिस्से में था,लेकिन अब इस पर मीडिया का एकाधिकार हो गया है .
देश की चार सर्वे एजेंसियों ने इस बार लगभग एक जैसे नतीजे परोसे हैं .सर्वे का आधार बहुत ज्यादा वैज्ञानिक नहीं  लाखों-करोड़ों मतदाताओं की मानसिक दशा का अंदाजा कुछ हजार लोगों से बात कर नहीं निकाला जा सकता .लेकिन ऐसे प्रयोग किये जा रहे हैं .यदा-कदा ये सर्वे असल नतीजों के करीब भी हुए हैं किन्तु प्राय:इन सर्वेक्षणों को मुंह की ही खानी पड़ी है .चुनाव आयोग शुरू से इन सर्वेक्षणों के खिलाफ रहा है .राजनीतिक दलों में भी इन  पर  राय नहीं है .जिसके पक्ष में सर्वे होता है वही इनके पक्ष में खड़ा दिखाई देता है और जिसके प्रतिकूल होतें हैं वे इनकी आलोचना करते हैं
चुनाव आयोग ने इस बार मतदान प्रक्रिया आरम्भ होने के बाद ओपिनियन और एक्जिट सर्वे पर रोक लगाई तो भाई लोग पोस्ट पोल सर्वे कर लाये .पता नहीं क्यों कोई असल नतीजों के आने का इन्तजार नहीं करना चाहता ?ये पहला मौक़ा था जब अनेक राज्यों में चुनाव आयोग की सख्ती की वजह से चुनाव "उत्स्व"में तब्दील नहीं हो  मतदाता ने भी मौन साध लिया,किन्तु मीडिया वाले कहाँ मानने वाले थे,सो पोस्ट पोल की दूकान खोल कर बैठे हुए हैं .
देश में इस बार इंडिया टुडे -+ओआरजी ,टाइम्स नाउ =सी वोटर,एवीपी +नील्सन और आई बी एन 7 =सीएसडीएस ने चुनावी सर्वे किये हैं .सभी एजेंसियों ने मिजोरम को छोड़ अन्य सभी चरों राज्यों में भाजपा की सरकार बनती दिखाई है .इन नतीजों  को भाजपा ने माना है कीनू कांग्रेस ने ख़ारिज किया है लेकिन वो मतदाता मौन है जिसने इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लिया है .मतदाता को समझ नहीं आ रहा कि वो इन सर्वेक्षणों पर किस तरह से प्रतिक्रिया दे?जनादेश को लेकर देश के मीडिया में इस तरह की हड़बड़ी हैरान करने वाली है .ये वही मीडिया है जिसने इस देश को चुनावों के दौरान नेताओं के भाषण बिना ब्रेक के दिखाए हैं ये पेड़ न्यूज थी या नहीं ये अलग मुद्दा है किन्तु इससे जाहिर है कि मीडिया इस चुनावी प्रक्रिया में एक औजार की तरह इस्तेमाल किया गया/या हुआ .इसलिए उसके आकलन पर आँख मूँद कर भरोसा करने को लेकर कोई गम्भीर होगा कहा नहीं जा सकता
मेरे ख्याल से चुनावी नतीजों को लेकर ये उतावलापन नादानी और अनैतिकता भरा कृत्य है .ये उन करोड़ों मतदाओं का अपमान भी है जो गोपनीयता  के भरोसे मतदान करते हैं .स्वायल ये है कि क्या देश दो-चार दिन चुनाव नतीजों की प्रतीक्षा नहीं कर सकता ?या राजनितिक दल और मीडिया मिलकर मतदाता और  की  जानबूझ कर हराम कर देना चाहते हैं .मीडिया यदि इतना ही विष्वसनीय और समर्थ है तो देश में चुनावों की आवश्यक्ता ही क्या है?क्यों महंगे चुनाव कराये जाएँ?बेहतर हो कि मीडिया से ही सर्वे करा कर सरकारें बना और बिगाड़ दी जाएँ /लेकिन ये नामुमकिन है,ठीक उसी तरह जिस तरह सर्वे के आधार पर चुनाव नतीजों को लेकर कोई भविष्यवाणी करना .
हैरानी इस बात की है कि मीडिया पूर्व में भी इस तरह के आकलनों में मुंह की खा चुका है,लेकिन किसी ने इससे सबक नहीं लिया .सबको अपनी टीआरपी और प्रसार संख्या बढ़ाने की फ़िक्र है .इस अंधी और बनानी होड़ ने मीडिया की लगता कम होती जा रही विश्व्सनीयता को दांव पर लगा दिया है ..इस ज्वलंत और विवादास
पद मुद्दे पर बहस और फैसले की परम आवश्यकता है

राकेश अचल
ग्वालियर

क्या होने वाला है 8 दिसम्बर को , ज्योतिष क्या कहता है

5 दिसम्बर को शुक्र राशि बदल रहे हैं , धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं, वृश्च‍िक राशि में बुधादित्य योग चल रहा है, जो कि 1 दिसंबर से शुरू हुआ है और 15 दिसंबर तक कायम रहेगा, इसके बाद 20 दिसम्बर से धनु राशि में यह बुधादित्य योग इस वर्ष के अंत तक चलेगा, मंगल कन्या राशि में चल रहे हैं, गुरू मिथुन राशि में वक्री चल रहे हैं, शनि औॅर राहू की युति तुला राशि में चल रही है, आज चन्द्रमा धनु राशि में है, 8 दिसम्बर को चन्द्रमा कुम्भ राशि में होंगें .... 8 दिसम्बर को ज्योतिष चौंकाने वाले नतीजे के जहॉं संकेत देता है वहीं बली चंद्र कुम्भ राशि में जाने से चंद्र बली लोग किंचित असमंजस, परेशानी और गहरे गह्वर में डूबता महसूस करेंगें, शुक्र का राशि परिवर्तन जहॉं कुछ लोगों के लिये सुकून बन कर उभरेगा और उन्हें राजपद एवं वाहन ऐश्वर्य , राजसुख व राजभोग, स्त्री सुख, सौंदर्य तथा साधन प्रदाता बन जायेगा तो कुछ लोगों से यही सब छीन लेगा, व्यक्ति विशेष के लिये यह सब जन्म कुंडली में शुक्र की स्थिति एवं दशा महादशा, गोचर दशा एवं अष्टक वर्ग की स्थ‍िति पर निर्भर करेगा , वृश्च‍िक राशि में बुधादित्य योग सूर्य व बुध बली लोगों के लिये राजपद दाता एवं राजसुख दाता के साथ व्यवसाय व्यापार प्रदाता बनेगा विशेषकर उन लोगों के लिये जिनकी जन्म कुंडली में सूर्य और बुध अच्छी स्थ‍िति में होगें , अन्यथा यदि जन्म कुंडली में इनकी स्थ‍िति ठीक नहीं है तो बाधाकारक और रूकावट पैदा करने वाले बन जायेंगें , शनि व राहू की युति संकेत देती है कि तंत्र मंत्र यंत्र , दान दक्षिणा , जादू टोना , काला जादू, कूटनीति, नीच नीति का न केवल बोलबाला रहेगा बल्क‍ि ऐसे वे लोग जो इनका प्रयोग करेंगें सफल और कामयाब भी होंगें ..... तदनुसार यहॉं आज 8 दिसम्बर की कुंडली यहॉं प्रस्तुत एवं प्रकाशि‍त की जा रही है ....

बुधवार, मई 01, 2013

शिवराज सिंह विश्‍वसनीय और गंभीर जुबान वाले नहीं, मुख्यमंत्री लायक आदमी नहीं - दिग्विजय सिंह

दिग्विजय ने शिवराज को कहा , एक जुबान का और विश्वसनीय आदमी नहीं है, म.प्र. का मुख्य मंत्री
कैलाश विजयवर्गीय को पड़ जाये तमाचा तो वे बन जायेंगें मुख्यमंत्री, कांग्रेस के हल्ला बोल में जमकर बरसे दिग्विजय सिंह
उज्जैन , 30 अप्रेल , आज उज्जै‍न में कांग्रेस के हल्ला बोल कार्यक्रम में म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने म.प्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर ताबड़तोड़ हमला बोलते हुये कहा है कि क्या हालत बना दी है शिवराज सिंह ने मध्यंप्रदेश की , चारों ओर बस अपराध ही अपराध , माफिया ही माफिया, गुण्डे ही गुण्डे , बलात्कार ही बलात्कार , अ.जा. / ज.जा. के लोगों पर बेतहाशा जुल्म और अत्या चार की इंतहा जो कि म.प्र के इतिहास में आज तक नहीं हुआ है । सारे रिकार्ड टूट गये हैं म.प्र. में । हमने अपनी सरकार में जो योजनायें बनाईं वे ही आज विकसित और फलीभूत हो रहीं हैं, प्रदेश की गॉंव गॉंव तक सड़कें बनाने की योजना हमने बनाई , काम हमने शुरू किया , जो हमने शुरू किया वही आज दिख रहा है , शिवराज सिंह का खुद का तो कुछ है ही नहीं खुद के पास ।
अत्याचार अपराध और अन्याय के अलावा चारों ओर भ्रष्टााचार , निरंकुश प्रशासन और अफसर , लगता है जैसे पूरे प्रदश में अराजकता ही अराजकता फैली हुयी है , प्रदेश में सरकार नाम की चीज ही नहीं रही है , प्रदेश का मुख्यमंत्री बेअसर, प्रभावहीन, और नाकारा बन कर बैठा है , कैलाश विजयवर्गीय जैसे अभद्र अशालीन भाषा बोलने, भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त को पाल पास रखा है , सुनने में आया है कि किसी अफसर को पार्षद चंदू शिंदे ने तमाचा मार दिया और उसके बाद उस अफसर की तरक्की हो गयी , इसका मतलब ये निकला कि अगर चंदू शिंदे एक तमाचा कैलाश विजयवर्गीय में मार दे तो कैलाश विजयवर्गीय की भी तरक्की होकर मुख्यमंत्री बन जायेंगें , एक और मंत्री विजय शाह ने भी भाजपा संस्कृति की व्याख्याा करते हुये जब शिवराज सिंह के घर में ही हाथ डाल दिया तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उसका पद छीन लिया, लेकिन खुले आम गुण्डागिरी कर रहे और निरंतर अभद्र व अशालीन भाषा का प्रयोग कर रहे, कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा लेने की हिम्मत ही नहीं है । कैलाश विजयवर्गीय किसी में भी तमाचा मारें चाहें गाली गलौज करें , कैलाश विजयवर्गीय को संरक्षण और विजयवर्गीय द्वारा सताये गये का भक्षण । हमने गरीबों को अज जजा के लोगों को पट्टे दिये लेकिन सुनने में आ रहा है कि न केवल उनके पट्टे कैंसिल किये जा रहे बल्किह उनकी खुद की भी जमीनें छीनी जा रहीं हैं ।
निहायत ही लचर और प्रभावहीन, नियंत्रण हीन ऐसी सरकार म.प्र. के इतिहास में कभी नहीं हुयी , कोई तो म.प्र. के मुख्यलमंत्री शिवराज सिंह को महाझूठा कहता है तो कोई घोषणावीर , कोई लबरा कहता है, कोई लाफर या लाफड़ कहता है, कोई लबार कहता है, कोई लपसा कहता है तो कोई लफ्फाज कहता है , ये क्याा हाल बना रखा है शिवराज ने , कोई सुनता मानता ही नहीं है पूरे म.प्र. में शिवराज की , मुख्य मंत्री कुछ भी कहता रहे , कुछ भी बकता रहे , पूरे प्रदेश में दो कौड़ी की कदर नहीं है , अरे भई सरकार का एक रूतबा होता है , एक तेजस्विता होती है सरकार में जिससे सब कुशलता पूर्वक नियंत्रित भी होता है और सरकार भी चलती है, मुख्य मंत्री रोजाना क्या कह रहे हैं, क्याा वायदा , क्या घोषणा कर रहे हैं , न खुद को कुछ याद है , न सरकार के पास कोई हिसाब है । ये कोई मुख्ययमंत्री है कि एक घोषणा कर दे और दूसरे दिन उसी घोषणा के खिलाफ पूरी सरकार और प्रशासन ठीक उलट काम करे । मुख्य मंत्री उसे कहा जाता है कि जिसकी जुबान गंभीर हो , जिसकी बात में दम हो, वजन हो ''जिसमें यह तासीर हो , कि जो कह दिया सो कह दिया, जो कर दिया सो कर दिया, फिर पूरी सरकार और प्रशासन में दम नहीं कि उस बात के उलट कुछ कर पाये, मुख्यमंत्री द्वारा कही गयी बात के खिलाफ कोई जा सके, मुख्य मंत्री के आदेश , घोषणा या वायदे को कोई टाल सके या काट सके'' , शिवराज सिंह क्या कहते हैं और क्या् करते हैं , उनकी हर घोषणा का , हर वायदे का क्याई अंजाम होता है , केवल म.प्र. के लोग ही नहीं पूरे देश के लोग जानते हैं ।

सोमवार, अप्रैल 29, 2013

म.प्र. में कांग्रेस के प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया तेज हुयी , सौ चुनी हुयी सीटों पर गंभीरता से प्रत्याशी चयन

मध्यप्रदेश में जुलाई तक ज्यादा से ज्यादा टिकट देने की कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की घोषणा पर भले ही उनकी पार्टी के नेताओं को भरोसा नहीं हो रहा है, लेकिन उन्होंने यह ऐलान हवा में नहीं किया है। इसके लिए उन्होंने पहले से ही करीब सौ विधानसभा पर अपना होमवर्क कर लिया है। होमवर्क के आधार पर ही वे जुलाई के अंत तक सभी उम्मीदवारों का ऐलान करेंगे । सूत्रों के मुताबिक राहुल का प्रदेश आने और यहां के प्रत्येक स्तर के नेताओं से बात करने के पीछे मकसद यही था कि वे पार्टी में एक जुटता ला सकें, ताकि वे जुलाई में टिकटों का ऐलान हो सके, जिससे कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी के काम में काम कर सकें। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश विधायक फिर से मैदान में उतारे जाएंगे। इनके अलावा करीब 30 से 40 सीटों पर राहुल गांधी की टीम ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई है। जिसके आधार पर इन सीटों से टिकट दिए जा सकते हैं। इनमेंअधिकांश वे क्षेत्र हैं जिन पर कांग्रेस लंबे अरसे से जीत दर्ज नहीं कर सकी है। ऐसे करीब एक दर्जन क्षेत्रों से युवा कांग्रेस के नेताओं को मुकाबले के लिए उतारे जाने की तैयारी है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहां पर कांग्रेस के हारे हुए उम्मीदवारों की फिर से पकड़ बनी है। पार्टी की पहली सूची में टिकट का वितरण सिर्फ जीत के पैमाने पर ही केंद्रित रहेगा ।

गुरुवार, दिसंबर 27, 2012

महाझूठे शिवराज सिंह के खस्ताहाल मध्यप्रदेश में बिजली कटौती फिर सिर चढ़ कर बोली

संभागीय मुख्यालय पर 16 घंटे और जिला मुख्यालयों पर 20 घंटे की बिजली कटौती
मुरैना 27 दिसंबर 12, स्वर्णिम म.प्र. बनाने का पिछले चार साल से दावा और वादा कर रही म.प्र. की शिवराज सिंह सरकार के बुरी तरह खस्ताहाल मध्यप्रदेश में पिछले एक हफ्ते से बिजली कटौती का कहर टूट पड़ा है । विकास और प्रगति के मामले में घुटनों पर रेंग रही म.प्र. की सरकार जब सन 2003 में सत्ता आई तो महज एक महीने के अंद 24 घंटे बिजली देने का वायदा करके आई । मगर हालात का आलम ये है कि भाजपा की सरकार को सत्‍ता में आये पूरे 10 साल गुजर गये 24 घंटे बिजली देना तो दूर आठ घंटे भी बिजली आज तक म.प्र. को मयस्सर नहीं करा पाई ।
सन 2008 के विधानसभा चुनावों में शिवराज सिंह चम्बल में पोरसा एवं जौरा की चुनावी सभाओं में वायदा करके गये थे कि पिछले 5 साल में हम आपको बिजली नहीं दे पाये लेकिन अब मेरा वायदा है कि अब अगर मेरी सरकार बनी तो मैं आपको 24 घंटे बिजली दूंगा , पोरसा की सभा में शिवराज सिंह ने यह वायदा किया कि अगर अबकी बार बरसात अच्छी हुयी तो मैं आपको 24 घंटे बिजली दूंगा , संयोगवश उस साल बहुत अच्छी वारिश हो गयी , बांघ ओवरफुल हो गये काफी पानी बांधों को खोलकर बाहर निकालना पड़ा तो चार पॉंच महीने बाद जौरा में हुयी शिवराज सिंह ने पलटी मारते हुये कहा कि अगर अबकी बार मेरी सरकार बनी तो आपको 24 घंटे बिजली दूंगा , संयोगवश शिवराज सिंह की सरकार भी बन गई तो अगले महीने ही शिवराज सिंह ने बयान दिया कि मैं क्या करूं केन्द्र कोयला ही नहीं दे रहा , मैं प्रदेश को बिजली कैसे दूं , इसके बाद जब केन्द्रीय कोयला मंत्री ने म.प्र. में आकर बयान दिया कि जितना चाहिये उतना कोयला लो , कोयले की कोई कमी नहीं है , पैसा दो और कोयला लो , तब उसके अगले महीने से शिवराज सिंह ने कहना शुरू किया कि केन्द्र घटिया कोयला दे रहा है , मैं क्‍या करूं प्रदेश को बिजली कैसे दूं , इसके कुछ समय बाद शिवराज सिंह ने कहा कि सबके फीछर अलग अलग किये जा रहे हैं , फीछर अलग अलग होते ही प्रदेश को 24 घंटे बिजली दूंगा । फीडर भी अलग अलग कर दिये गये प्रदेश में कटिया डालना भी सन 2010 में ही बंद करा दिया गया, हाईटेंशन लाइनें सीधे हर घर तक डाल कर घर घर में मीटर टांग दिये गये बिजली के बिल आठ गुना तक बढ़ा दिये गये , दिग्विजय सिंह के शासनकाल में जिन घरों में बिजली का बिल 200 रूपये आता था उन घरों का बिजली का बिल 2000 रूपये महीने से भी ऊपर आने लगा मगर बिजली फिर भी प्रदेश को मयस्सर नहीं हुयी ।
हाल ये है कि अब तासे शिवराज सिंह के पास कोई बहाना भी नहीं बचा , अगले साल सन 2013 में फिर विधानसभा चुनाव है , सुनने में आ रहा है कि अब शिवराज सिंह चुनाव के ऐन वक्त पर प्रदेश को 24 घंटे बिजली देंगें , सवाल यह है कि दस साल तक म.प्र. को खून के ऑंसू रूला देने वाले शिवराज सिंह को दस महीने चुनाव काल में बिजली देने का जनता पुरूकार देगी या दंड । यह देखने की बात होगी कि पत्ते पत्ते पर गुलांटी खाने वाले, महज घोषणायें करने और लगातार दनादन झूठ बालने शिवराज सिंह को प्रदेश की जनता अबकी बार पुन: सत्तासीन करेगी या सत्ता से बाहर धकेल कर सदा सर्वदा के लिये राजनीति से बाहर कर देगी ।